Description
यह संग्रह इंसानी जज़्बातों के अलग-अलग रंगों को छूता है। इसमें कुल 132+ पन्ने हैं और कई खंडों में कविताएँ बाँटी गई हैं:
- प्रेम और प्रतीक्षा
इस खंड में प्यार, विरह, इंतज़ार और रिश्तों की नज़ाकत पर लिखी कविताएँ हैं। भावनाओं की गहराई और मिलने-बिछड़ने के एहसास को शब्द दिए गए हैं। - कुछ हटके
नाम से ही साफ है – ये रचनाएँ थोड़ा अलग हैं। समाज, सोच, ज़िंदगी के अनदेखे पहलुओं पर बेबाक और नई नज़र से लिखी गई कविताएँ। - गीत और ग़ज़लें
लय और सुर में पिरोई गई रचनाएँ। ग़ज़लों की नज़ाकत और गीतों की मिठास, दोनों का संगम इस हिस्से में मिलता है। - पाठकों की कलम से
ये सबसे खास हिस्सा है – इसमें पाठकों द्वारा भेजी गई कविताएँ शामिल हैं। यानी ये किताब सिर्फ लेखक की नहीं, पाठकों से भी जुड़ती है।
किताब का मिज़ाज
कुल मिलाकर जहाँ तुम हो एक ऐसी किताब है जो प्यार, यादों, इंतज़ार और ज़िंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों को कविता के ज़रिए सामने लाती है। भाषा सरल हिंदी है, पर भाव बहुत गहरे हैं।






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